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कहां से पावले रे डोमवा Kahan Se Pavle Re Domva --Bhojpuri (Virendra Bharti) Domkach Geet Lyrics

Kahan Se Pavle Re Domva Is Bhojpuri (Virendra Bharti) Domkach Geet Lyrics Sung By Birendra Bharati . This Song Is Written By Traditional  ...


Kahan Se Pavle Re Domva Is Bhojpuri (Virendra Bharti) Domkach Geet Lyrics Sung By Birendra Bharati. This Song Is Written By Traditional While Music Composed By Composition. It’s Released By Sainath Intertenment.

This song is based on a different genre. It is called Domkach. This Domkach is sung in Bihar and Jharkhand. It is addressed in a way on the occasion of marriage by singing satiric and humorous songs towards the family members of the bride and groom. In the song presented, the poet says that hey Domwa (Dom = a kind of caste) from where did you bring such a beautiful wife? It is beautiful as well as quality. To this Domwa says that I have taken it from a fair. Then the man asks what will you feed it and where will you keep it. As such, there is a program of many types of questions and answers.


फिल्म : यूटयूब चैनल से साभार (Album: From Youtube Channel)

गायक : वीरेन्द्र भारती (Singer: Birendra Bharati)

गीतकार: पारंपरिक (Lyrics: Traditional)

संगीतकार: संयोजन (Music: Composition)

लेबल: साईनाथ इंटरटेनमेंट (Lable: Sainath Intertenment)



अरे कहां से पवले रे डोमवा 

अब हईं कहां से पवले रे

कहां से पवले रे डोमवा कहां से पवले रे 

कहां से पवले रे डोमवा कहां से पवले रे 

अइसन सुघरि डोमिनिया डोमवा कहां से पवले रे

अइसन सुघरि डोमिनिया डोमवा कहां से पवले रे

मेला में पवलीं ना राजा बाजारी में पवलीं ना

मेला में पवलीं ना राजा बाजारी में पवलीं ना

त अइसन सुघरि डोमिनिया ए राजा मेला में पवलीं ना

अइसन सुघरि डोमिनिया मालिक मेला में पवलीं ना हां


कत खिएैबे रे डोमवा कत पिएैबे रे

हाय हाय कत खिएैबे रे डोमवा कत पिएैबे रे

कत खिएैबे रे डोमवा कत पिएैबे रे

त अइसन सुघरि डोमिनिया के डोमवा कत खिएैबे रे

अइसन सुघरि डोमिनिया के डोमवा कत खिएैबे रे

कोइजई खियाइब ना ए राजा मकुन खियाइब ना

हाय हाय कोइजई खियाइब ना राजा मकुन खियाइब ना

जवन बाटे हमर लगवां ए राजा उहे खियाइब ना

जवन बाटे हमर लगवां ए राजा उहे खियाइब ना

कहां से पवले रे डोमवा कहां पवले रे

कहां से पवले रे डोमवा कहां पवले रे

अरे अइसन सुघरि डोमिनिया ए डोमा कहां से पवले रे

अइसन सुघरि डोमिनिया डोमा कहां से पवले रे

हो अइसन सुघरि डोमिनिया डोमा कहां से पवले रे

अइसन सुघरि डोमिनिया मालिक मेला में पवलीं ना ए हां



यह गीत एक अलग तरह की विधा पर आधारित है। इसे डोमकच कहते हैं। इस डोमकच को बिहार और झारखंड में गाया जाता है। इसको विवाह के अवसर पर एक तरह से दूल्हे और दुल्हन के परिवार वालों के प्रति व्यंगपूर्ण एवं हास्य रस वाले गीतों से गाकर संबोधित किया जाता है। प्रस्तुत गीत में कवि कहता है कि अरे डोमवा (डोम=एक प्रकार की जाति) तुमने इतनी सुंदर पत्नी कहां से लाया? यह सुंदर होने के साथ साथ गुणवान भी है। इस पर डोमवा कहता है कि मैंने इसे एक मेले में से लिया है। फिर आदमी पूछता है कि इसे तु क्या खिलाओगे और कहां रखोगे। जैसे कई तरह के प्रश्न और उत्तर का कार्यक्रम चलता है। 

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