Searching...
Friday, July 30, 2010

तु मत मार मुसुकी चवनिया

अभी तू कुंवार वाडू ओढ ल ओढनिया-२
ऐ सुग्गी-३ ऐ सुग्गी ऐ सुग्गी-२
तु मत मार मुसुकी चवनिया-२

कपड़ा के फाड़दी दुनाली के नोखी
बुढ़वो जब देखी त आवे लगी खोखी-२
अभी से सुधार ल तू आपन रहनिया-२


ऐ सुग्गी-२ तू मत...

जब तू पहिरेलू टू पीस मेक्सी,
जोवना उधर जाला लागेलू सेक्सी-२
नवही के मुंहमा में चुवतावे पनिया-२

ऐ सुग्गी.....
तू मत....

नागिन जइसे लचके पतरी कमरिया
बुढ़वो पर मार देलु कनखी नजरिया-२
अरुण बाबा लिख देहके तोहरो कहनियां-२

ऐ सुग्गी........
तू मत.................

0 comments:

Post a Comment

loading...

advertisement

 
Back to top!