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तोहर पिया छौ शहर के बबुआन गे बहिना Tohar Piya Chhau Shahar Ke Babuaan Ge Bahina

The song compares the farmer and the urban man. In this, a friend compares her other friend to her husband and says that O friend, your husb...


The song compares the farmer and the urban man. In this, a friend compares her other friend to her husband and says that O friend, your husband is the babu of the city, then my husband is a farmer of the village. She further says that O friend. Your husband earns a lot of money by working with someone else and comes home only once in a year or in six months. Brings some of your belongings too. But my husband is a farmer and works in the fields with a turban on his head. Due to which there is a heap of food in the courtyard of the house. My husband is thin and runs after the bull in the fields. My husband likes to eat marua's roti and maize. His stature is like that of a wrestler. Your husband makes sense of the argument while watching TV. Also eats pizza. Therefore he does what is written in his karma.


फिल्म :  

गायक :  पूनम मिश्रा

गीतकार:  

संगीतकार: 



तोहर पिया छौ 

गे तोहर पिया छौ शहर के बबुआन गे बहिना

मोर पिया गाम के किसान गे

तोहर पिया छौ शहर के बबुआन गे बहिना

मोर पिया गाम के किसान 

गे बहिना मोर पिया गाम के किसान 


तोहर पिया आनक नौकर बन पैसा खूब कमाबै छौ

पैसा खूब कमाबै छौ

छह महीना आ एक बरख पर कहियो घूइर घर आबै छो

कहियो घूइर घर आबै छो

गे लाबै छो गे लाबै छो किछु़ तोरा लाय समान गे बहिना

मोर पिया गाम के किसान 

गे बहिना मोर पिया गाम के किसान 


हम्मर पिया सिर बाइन्ह मुरेठा बरदक पाछू भागै छै

बरदक पाछू भागै छै

बुझलें

अपन मनक अपने मालिक खेतहूं से घुरि आबै छै

खेतहूं से घुरि आबै छै

भरल रहल छै भरल रहल छै गे उपजा सं खलिहान गे बहिना

मोर पिया गाम के किसान 

गे बहिना मोर पिया गाम के किसान 


लिक लिक पातर तोहर पिया के चाह पकौड़ी भागै छौ

चाह पकौड़ी भागै छौ

ठीके बात छै नै

रंग बिरंगक वस्त्र ताहि पर पाउडर सेंट लगाबै छौ

पाउडर सेंट लगाबै छौ

पाउडर सेंट लगाबै छौ

गे शीतल केस गे शीतल केस गलथने मुंह में पान गे बहिना

मोर पिया गाम के किसान 

गे बहिना मोर पिया गाम के किसान 


हम्मर पिया के मरुआ के रोटी मकई के फुटहा भावै छै

मकई के फुटहा भावै छै

धोती क धठ्ठा ओढ़ी चौक पर खैनी चून लगाबै छै

खैनी चून लगाबै छै

गे बम पिलाट छै गे बम पिलाट छै नामी पहलवान गे बहिना

मोर पिया गाम के किसान 

गे बहिना मोर पिया गाम के किसान 


टीवी सुनैलन तर्क लगौलेन झगड़ा के की अर्थ छै

झगड़ा के की अर्थ छै

टेको ने थामे रहे पिज्जा लाय एहन कहब त व्यर्थ छै

एहन कहब त व्यर्थ छै

करम लिखल कर्म लिख के मेट सके बबुआन गे बहिना

मोर पिया गाम के किसान 

गे बहिना मोर पिया गाम के किसान 


तोहर पिया छौ 

गे तोहर पिया छौ शहर के बबुआन गे बहिना

मोर पिया गाम के किसान गे

तोहर पिया छौ शहर के बबुआन गे बहिना

मोर पिया गाम के किसान 

गे बहिना मोर पिया गाम के किसान 



इस गीत में किसान और शहरी व्यक्ति की तुलना की गई है। इसमें  एक सखी अपनी दूसरी सहेली से उसके पति से तुलना करते हुए कहती है कि ऐ सखी तुम्हारा पति शहर का बाबू है तो मेरा पति गांव का किसान है। आगे कहती है कि ऐ सखी। तुम्हारा पति किसी दूसरे के यहां नौकरी करके खूब पैसा कमाता है और साल में या छह महीना में एक बार ही घर आता है। तुम्हारे कुछ सामान भी लाता है। लेकिन मेरा पति किसान है और सिर पर पगड़ी बांधे खेतों में काम करता है। जिससे घर आंगन में अन्न का ढेर लगा रहता है। मेरा पति दुबला पतला है और खेतों में बैल के पीछे पीछे दौड़ लगाता है। मेरे पति को मरुआ के रोटी और मक्का पसंद है खाने में। उसकी कदकाठी पहलवान की तरह है। तुम्हारा पति टीवी देखते हुए बहस का अर्थ लगाता है। साथ ही पिज्जा भी खाता है। इसलिए जो जिसके कर्म में लिखा है वही वह करता है। 

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