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दोस्तों, अब आपके लिए एक नया ब्लॉग मैंने अपडेट कर दिया है। इस ब्लॉग में आप सिर्फ शारदा सिन्हा जी के गाए हुए गाने ही सुनेंगे। उनके गाए गीत भोजपुरी व मैथिली दोनों ही भाषाओं के साथ हिन्दी फिल्मों में गए गीत भी शामिल रहेंगे। साथ ही साथ इस पेज पर स्पेशल रूप से विवाह गीतों की एक अलग श्रृंखला भी दी जाएगी जिसमें शादी विवाह में गाए जाने वाले विभिन्न मिजाज व मूड के गाने आप सुन सकेंगे। फिलहाल इस ब्लॉग का लिंक इस प्रकार है: https://shardasinhageet.blogspot.com/


Friends, now I have updated a new blog for you. In this blog you will only listen to the songs sung by Sharda Sinha ji. Along with the songs sung by him in both Bhojpuri and Maithili languages, songs sung in Hindi films will also be included. Along with this, a separate series of marriage songs will also be specially given on this page, in which you will be able to listen to the songs of different moods and moods sung in marriage marriage. Currently the link of this blog is as follows: https://shardasinhageet.blogspot.com/

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सावन हे सखी सर्व सुहावन Sawan He Sakhi Sarv Suhavan---Bhojpuri Kajari Lyrics

This song is about the women who is married and recalls her husband who is away from her and his family to earn his livelihood.  she celeb...




This song is about the women who is married and recalls her husband who is away from her and his family to earn his livelihood. she celebrates the Shravan Jhoola  without her husband and she says without you this festival is incomplete. Then his husband reply that once he will come back will celebrate this festival with you and family 

Sawan He Sakhi Sarv Suhavan Is Bhojpuri Kajari Lyrics Sung By Kanchan Pathak. This Song Is Written By Traditional While Music Composed By composition. It’s Released By Kanchan pathak Youtube Channel.

फिल्म : सावन हे सखी सर्व सुहावन (Album: Sawan He Sakhi Sarv Suhavan )

गायक : कंचन पाठक (Singer: Kanchan Pathak)

गीतकार:  पारंपरिक (Lyrics: Traditional)

संगीतकार: संयोजन (Music: composition)

लेबल: कंचन पाठक यूटयूब चैनल (Lable: Kanchan pathak Youtube Channel)


सावन हे सखी सर्व सुहावन

सावन हे सखी सर्व सुहावन

रिमझिम बरसल मेघ हो

सबके बलमुआ रामा घरे चली अइले हो

हमरे बलमुआ परदेश हो 

सबके बलमुआ रामा घरे चली अइले हो

हमरे बलमुआ परदेश हो 


तोहरा से बाटे धनि हमरो त नेहिया हो 

तोहरा से बाटे धनि हमरो त नेहिया हो 

कैसे बिसारब तोहके मन से

हमरा ऊपर बानि देशवा के करज हो

अब न रहब परदेस हो

सबके बलमुआ रामा घरे चली अइले हो

हमरे बलुमा परदेश हो 


आषाढ़ हे सखि असरा लगवनी हो

हमरा त न पूरल मान हो

पिया जब रहते त आस पुरबिते हो

पिया त बारी परदेस हो

सबके बलमुआ रामा घरे चली अइले हो

हमरे बलुमा परदेश हो 



कार्तिक हे धनि परब महीना हो

हम त रहब तोहरे आस हो

बबुनी बबुआ संगे तोहसे मिले के हो

पूरा त होई मन के आस हो

पूरा त होई मन के आस हो

सबके बलमुआ रामा घरे चली अइले हो

हमरे बलुमा परदेश हो 

अब ना रहब परदेस हो

हमरे बलुमा परदेश हो 

अब ना रहब परदेस हो

हमरे बलुमा परदेश हो 

अब ना रहब परदेस हो






इस गाने का मूल भाव यह है कि:
एक पत्नी अपने पति के घर से बाहर रहने पर सावन के महीने में याद करती है और सावन के झूले और  पर्व को पति के बिना मनाने की अनिच्छा व्यक्त करती है। उसी तरह उसका पति भी इस बात को स्वीकारता है और कहता है कि मेरे ऊपर परिवार का बोझ है जिसके लिए बाहर कमाने आया हुआ हूं। समय मिलेगा तो तुमसे और परिवार के अन्य सभी सदस्यों से मिलूंगा। उनके साथ बैठकर बातें करुंगा। तुम उदास मत होना। 


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