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गवना कराके सैंया घरे Gawna Karake Saiyan Ghare ----Bhojpuri (Virendra Bharti) Bidesiya Lyrics

Gawna Karake Saiyan Ghare Is Bhojpuri (Virendra Bharti) Bidesiya Lyrics Sung By Birendra Bharti . This Song Is Written By Bhkhari Thakur  ...



Gawna Karake Saiyan Ghare Is Bhojpuri (Virendra Bharti) Bidesiya Lyrics Sung By Birendra Bharti. This Song Is Written By Bhkhari Thakur While Music Composed By Traditional. It’s Released By Sainath Entertainment.

The composer of this song is Bhikhari Thakur. Bhikhari Thakur was a well-known poet, lyricist of Bhojpuri language. Through his songs, he exposed the evils prevalent in the society of that time and made people aware of it. In this song he is describing the agony of a woman who is waiting for her husband to come from abroad. An acquaintance of hers, who is going abroad where her husband works, tells the woman that if you describe your husband's appearance and thoughts correctly, then I will tell him your condition. And ask him to come here. How does he feel, is he fair or dark? I will say more than you that he will come home to meet you as soon as possible. So the woman says that she wears a dhoti till the knot, her nose is like a parrot's lip. He wears a turban on his head and has a broad chest. Made me sit at home after getting Gauna and went abroad on my own. Tell him that the mango in Mojar is now more ripe than Tikola and has become yellow. This is my condition. Ask her to come home as soon as possible.


फिल्म :  गवना कराके सैंया घरे (Album: Gawna Karake Saiyan Ghare)

गायक : वीरेन्द्र भारती (Singer: Birendra Bharti)

गीतकार: भिखारी ठाकुर (lyrics: Bhkhari Thakur)

संगीतकार: पारंपरिक ( Music: Traditional)

लेबल: साईनाथ इंटरटेनमेंट (Lable: Sainath Entertainment)


कइसन पिया तोर सांवर कि हउवन गोर

कइसन पिया तोर सांवर कि हउवन गोर

सचमुच रूपवा बता द प्यारी धनिया

जाइके कहब हम तोहरा से नाहीं कम

अ अधिका बुझाई जतना तक प्यारी धनिया


अरे घुट्‌ठी पर ल धोती कोर 

हो घुट्‌ठी पर ल धोती कोर 

हई नकिया सुगा के ठोर

आ सिरवा पे पगरी छाती चौड़ी रे बिदेसिया


कि अरे गवना कराके सैंया घरे बैइठवलस 

गवना कराके सैंया घरे बैइठवलस 

अपने गइल परदेस रे बिदेसिया

अपने गइल परदेस रे बिदेसिया


अमवां मोजरिया गइले लगले टिकोरवा से

अमवां मोजरिया गइले लगले टिकोरवा से

दिन पर दिन पियराइ रे बिदेसिया

दिन पर दिन पियराइ रे बिदेसिया

गवना कराके सैंया घरे बैइठवलस

गवना कराके सैंया घरे बैइठवलस

अपने गइल परदेस रे बिदेसिया

अपने गइल परदेस रे बिदेसिया

अपने गइल परदेस रे बिदेसिया


इस गीत के रचयिता भिखारी ठाकुर हैं। भिखारी ठाकुर भोजपुरी भाषा के एक जाने माने कवि, गीतकार थे। उन्होंने अपने गीतों के माध्यम से उस समय के समाज में व्याप्त कुरीतियों को उजागर किया और लोगों को इसके प्रति जाग्रत किया। इस गीत में वे एक ऐसी महिला की व्यथा का वर्णन कर रहे हैं जो अपने पति के विदेश से आने की प्रतीक्षा में है। उसका एक परिचित जो विदेश जा रहा है जहां उसका पति काम करता है वह महिला से कहता है कि तुम अपने पति के रंग रूप, बात विचार सही सही वर्णन करके कहो तो मैं उसे तुम्हारा हाल कहूंगा और उसे यहां आने को कहूंगा। वह कैसा लगता है गोरा है या सांवला? तुमसे ज्यादा ही वह बात कहूंगा जिससे वह तुमसे मिलने जल्दी से जल्दी घर आ जाएगा। तो महिला कहती है कि घुट्‌ठी तक धोती पहना करता है, उसका नाक तोता के ओंठ की तरह है। सिर पर पगड़ी पहनता है और चौड़ी छाती वाला है। गौना कराके मुझे घर पर बैठा दिया और अपने खुद विदेश चला गया। उससे कहना कि आम में लगे मोजर अब टिकोला से भी बढ़कर पक रहा है और पीला हो गया है। यही मेरी दशा है। उसे जल्दी से जल्दी घर आने को कहना। 

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