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उठी भोरे कहु हरि-हरि--Uthi Bhore Kahu Hari Hari--Maithili Parati (पराती) Lyrics

Uthi Bhore Kahu Hari Hari Is Maithili Parati (पराती) Lyrics Song Sung By Kumkum Mishra . This Song Is Written By Baba Laxminath Gosai  Whi...





Uthi Bhore Kahu Hari Hari Is Maithili Parati (पराती) Lyrics Song Sung By Kumkum Mishra. This Song Is Written By Baba Laxminath Gosai While Music Composed By Rajesh Jha. It’s Released By Kumkum Mishra Youtube Channel.


एल्बम: उठी भोरे कहु हरि-हरि (Album: Uthi Bhore Kahu Hari Hari)


गायिका: कुमकुम मिश्रा (Singer: Kumkum Mishra)

गीतकार: बाबा लक्ष्मीनाथ गोसाईं (Lyrics: Baba Laxminath Gosai)

संगीतकार: राजेश झा (Music: Rajesh Jha)

लेबल: कुमकुम मिश्रा यूटयूब चैनल (lable: Kumkum Mishra Youtube Channel)



उठी भोरे कहु हरि-हरि हरि-हरि

उठी भोरे कहु हरि-हरि हरि-हरि

राम कृष्ण कें कथा मनोहर

राम कृष्ण कें कथा मनोहर

सुमिरन कर ले घड़ी-घड़ी हरि-हरि

उठी भोरे कहु हरि-हरि हरि-हरि

उठी भोरे कहु हरि-हरि हरि-हरि


दुर्लभ राम नाम रस मनवा

पी ले अमृत भरि भरि 

दुर्लभ राम नाम रस मनवा

पी ले अमृत भरि भरि 

अंजुली जल जस घटक दिवस निस 

अंजुली जल जस घटक दिवस निस 

चला जात जग मरि-मरि हरि-हरि

उठी भोरे कहु हरि-हरि हरि-हरि

उठी भोरे कहु हरि-हरि हरि-हरि


मैं मैं कर ममता मद भूले

अदा मेख सम चरी-चरी 

मैं मैं कर ममता मद भूले

अदा मेख सम चरी-चरी 

सन्मुख प्रबल सोन नहीं सूझत

सन्मुख प्रबल सोन नहीं सूझत

आखिर खइहें घड़ी घड़ी हरि हरि

उठी भोरे कहु हरि-हरि हरि-हरि

उठी भोरे कहु हरि-हरि हरि-हरि


दिवस गंवाए पेट के कारण

लन्द फन्द छन करि-करि 

दिवस गंवाए पेट के कारण

लन्द फन्द छन करि-करि 

निस नारी संग सोय गंवाये

निस नारी संग सोय गंवाये

विषय आगि में पड़ी-पड़ी हरि-हरि

उठी भोरे कहु हरि-हरि हरि-हरि

उठी भोरे कहु हरि-हरि हरि-हरि


नाहक जीवन खोये गवांए

चिंता से तन झरि-झरि

नाहक जीवन खोये गवांए

चिंता से तन झरि-झरि

लक्ष्मीपति अजहू भजु रघुवर

लक्ष्मीपति अजहू भजु रघुवर

यदुवर पदवूर घरी-घरी हरि-हरि

उठी भोरे कहु हरि-हरि हरि-हरि

उठी भोरे कहु हरि-हरि हरि-हरि


उठी भोरे कहु हरि-हरि हरि-हरि

उठी भोरे कहु हरि-हरि हरि-हरि

राम कृष्ण कें कथा मनोहर

राम कृष्ण कें कथा मनोहर

सुमिरन कर ले घड़ी-घड़ी हरि-हरि

उठी भोरे कहु हरि-हरि हरि-हरि

उठी भोरे कहु हरि-हरि हरि-हरि

उठी भोरे कहु हरि-हरि हरि-हरि

उठी भोरे कहु हरि-हरि हरि-हरि

उठी भोरे कहु हरि-हरि हरि-हरि

उठी भोरे कहु हरि-हरि हरि-हरि



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