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Saturday, July 31, 2010

हेलल हेलल भंइसिया पानी में

अरे आगे चल के का करब जब
माझा ढील जवानी में
हेलल हेलल भंइसिया पानी में-२
दुधवा न देले जवानी में-४
हेलल.......


अइसन चाल करम असली पा होती घर घर कइल
जहवा गइल छूके बरबस गोरबो गोबर कइल
दिहल बड़ा करारा धोखा जेकर संधी भइल
जे कइलस विश्वासघात ओही के संघे फइल
आग लगावे वाली भाषा-२
बसे बरोबर वाणी में,
हेलल............
बोली बड़ बोलन के आउरी छोटे आचरण एतना
नेग इ धमकी आउर लुच्चई अइसन जेकर गहना
बाप मतारी के न गिनल उनके नित गरिअबल
भाई बंधु कुटुंब लोग के एतना तु अब जिअबल
परेम उमरी ओराइल ठोप भर-२
तेल निकलल धामी में,
हेलल......
उजरल टी पर रीझल मन जब ओही में रम गइल
फूल के सुहराई देखल त अंगिया से लपटइल
रहल एतना नरम ऐ बबुआ माया में अझुरइल
दाल न गल पवलस तनिकें में हुकुर नियर पर इल
रही न जान पेहानी में,
 हेलल.....
भक्ति बने बिलारो रानी खाके सौ सौ चूहा
एहो मंगरु मन होखे त बिना पिन्हौले दुह
नाम चान बन पवलस जहवा रहल बने मरहा
एही चरचा रे ओरी ले देश भइल बा अगरा
गांजी-२ सगरो से कइले अपने घर के मीट,
रात के मंगवा लिहले घर के चानी के उ टीका
शिल्यान्यास सब देखने कइलस-२
भइल पुलिस निगरानी में,
हेलल............
दु दिन के जिंदगानी ऐमे केतना बड़ा झमेला
बीच भंवर में नइया पर मल्लाह देखावे खेला
होम कथा बरही वियाह हो तेरही पिंड सराधा
सगरो महंगाई उ पुरोहित खातिर दक्षिणा आधा
चुन धर्मेंद्र बाबा दूसर धंधा-२
मजा न अब जजमानी में
हेललल............................

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