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Friday, July 3, 2015

एक त मो बारी भारी


गायक : मदन राय







एक त मो बारी भारी
दूसरे पियवा गइलन रे चोरी
(एगो दोहा याद आ गइल..
कवि नागिन व विरहिन के जहर के तुलना कइले बानी
नागन बैठी राह में कि बिरहिन पहुंची आय
नागन डर गई आपके कि बिरहिन डस न जाए
कैसे भईया नागन डेरा जात बिया
नाहर के नख में बसे दंते बसे भुजंग
बिच्छिी के पोंछी बसे बिरहिन के सब अंग)

एक त मो बारी भारी
दूसरे पियवा गइलन रे चोरी
अरे सखी आरे
तीसरे बिरह से देहिया मातल ए राम
अरे सखी आरे
तीसरे बिरह से देहिया मातल ए राम
एक त मो बारी भारी
दूसरे पियवा गइलन रे चोरी
अरे सखी आरे
तीसरे बिरह से देहिया मातल ए राम

फूल लोढ़े गइली बारी
सारी मोरी अटकल डारी
फूल लोढ़े गइली बारी
फूल लोढ़े गइली बारी
फूल लोढ़े गइली बारी
सारी मोरी अटकल डारी
अरे सखि आरे
पिया बिन सरिया केहू न छोड़ाबे ए राम
अरे सखि आरे
पिया बिन सरिया केहू न छोड़ाबे ए राम
एक त मो बारी भारी
दूसरे पियवा गइलन रे चोरी
अरे सखी आरे
तीसरे बिरह से देहिया मातल ए राम

झूलत झूलत बारी
चढि़ गइली महल अटारी
झूलत झूलत बारी
चढि़ गइली महल अटारी
अरे सखी आरे
जहवां रे जोगिया धूनिया रमाबेला ए राम
अरे सखी आरे
जहवां रे जोगिया धूनिया रमाबेला ए राम
एक त मो बारी भारी
दूसरे पियवा गइलन रे चोरी
अरे सखी आरे
तीसरे बिरह से देहिया मातल ए राम

सारी मोरी फाटी गइली
अंगिया मसकी रे गइली
सारी मोरी फाटी गइली
अंगिया मसकी रे गइली
अरे सखी आरे
नयना टपकी के नवरंग भीजेला ए राम
अरे सखी आरे
नयना टपकी के नवरंग भीजेला ए राम
एक त मो बारी भारी
दूसरे पियवा गइलन रे चोरी
अरे सखी आरे
तीसरे बिरह से देहिया मातल ए राम

जौना रे मंदिरवा में
अति सुख पवनी हम
जौना रे मंदिरवा में
अति सुख पवनी हम
अरे सखी आरे
ओहिरे मंदिरवा अगिया लागल ए राम
अरे सखी आरे
ओहिरे मंदिरवा अगिया लागल ए राम
एक त मो बारी भारी
दूसरे पियवा गइलन रे चोरी
अरे सखी आरे
तीसरे बिरह से देहिया मातल ए राम

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