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Friday, April 22, 2016

तोरी गइले सपन सनेहिया हो रामा


गायक : मनोज तिवारी मृदुल
एल्बम : चैता, चैइती


मोजर गमके बगिया बीचे, तापर कोइलिया कूके
या बसंत के अंत में जइह, न तो मरब दुखे
का अइल का जाइह राजा  अरे गोला गुआ छूके
दाथ मलिहा दीदा सोझा मूरख है जो चुके

तोरी गइले सपन सनेहिया हो रामा पिया परदेशिया
तोरी गइले सपन सनेहिया हो रामा पिया परदेशिया
तोरी गइले सपन सनेहिया हो रामा पिया परदेशिया
तोरी गइले सपन सनेहिया हो रामा पिया परदेशिया

डंसी डंसी जाले माथे के बिंदिया
लुटी गइली हमरो नेनवा के निंनिया
बुझे ना मरम निरमोहिया हो रामा पिया परदेशिया
तोरी गइले सपन सनेहिया हो रामा पिया परदेशिया

पापी पपीहरा के बोलिया ना भावे
आधी रतिया के जिया धधकावे हो रामा
रोजे उसकावेला दरदिया हो रामा पिया परदेशिया
रोजे उसकावेला दरदिया हो रामा पिया परदेशिया
तोरी गइले सपन सनेहिया हो रामा पिया परदेशिया

केहु सुने धुन मोरा बिरह के बतिया
विकल करेला आज उरल पिरितिया
घर ही में भइली बनबसिया हो रामा पिया परदेशिया
घर ही में भइली बनबसिया हो रामा पिया परदेशिया
तोरी गइले सपन सनेहिया हो रामा पिया परदेशिया

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