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Sunday, December 8, 2019

बाबू दरोगाजी कौन कसूर पर धरले सैंया मोर


गायिका : शमशाद बेगम
फिल्म: तकदीर (1943)
गीतकार: अशोक पीलीभीत
संगीतकार: रफीक गजनवी





(दोस्तों इस गीत को यहां लाने का मुख्य कारण यह है कि इसी गाने से हिन्दी फिल्मों में भोजपुरी शब्दों का प्रयोग शुरू किया गया। यह पहली फिल्म थी जिसमें इस तरह का प्रयोग किया गया। कारण यह था कि इस फिल्म की नायिका नरगिस की माता जद्दनबाई को एक ठुमरी बहुत पसंद थी जिसे वह अपनी बेटी के फिल्म में लाना चाह रही थी। उन्होंने फिल्म के निर्माता निर्देशक  महबूब खान से कहा कि इसे आप रखो। महबूब खान ने यह कहकर मना कर दिया कि इसमें कोई सिचुएशन नहीं है जिससे यह गाना रखा जाए। अब जद्दनबाई अड़ गई कि अगर यह ठुमरी यहां न रखी जाएगी तो मेरी बेटी आपके फिल्म में काम नहीं करेगी। गाने के बोल कुछ इस तरह से थे : बाबू दरोगाजी कवने कसूरबा भइल संइयां मोर, ना मोरा सैंया लुच्चा लंगटवा, ना मोर सौंया चोर......। इसकी रचना पूर्वी सम्राट महेंन्द्र मिसिर की थी और उस समय बनारस की बाईयों के कोठों पर खूब मशहूर थी। बाद में महबूब खान ने गीतकार अशोक पीलीभीती से कुछ फेर बदल कर इसे इस रूप में तैयार करवाया।  स्त्रोत: भोजपुरी फिल्मों का सफरनामा किताब लेखक: रविराज पटेल)


बाबू दरोगाजी कौन कसूर पर धरले सैंया मोर
बाबू दरोगाजी
बाबू दरोगाजी कौन कसूर पर धरले सैंया मोर
बाबू दरोगाजी
ना कोई ना नौकर
ना कोई ना नौकर
ना कोई ना नौकर
ना कोई ना नौकर
ना सैंया मोरा चोर
ना सैंया मोरा चोर
मदिरा कमाता सड़किया पर सोता
सैंया को धरले मोर
मदिरा कमाता सड़किया पर सोता
सैंया को धरले मोर
बाबू दरोगाजी
बाबू दरोगाजी कौन कसूर पर धरले सैंया मोर
बाबू दरोगाजी



बाली उमरिया बीतत जाए
बाली उमरिया बीतत जाए
नहीं पड़त मायका चैन
नहीं पड़त मायका चैन
छतिया हू धक धक बिन बाके बलमा
सैंया को दैई तो मोर
छतिया हू धक धक बिन बाके बलमा
सैंया को दैई तो मोर
बाबू दरोगाजी
बाबू दरोगाजी कौन कसूर पर धरले सैंया मोर
बाबू दरोगाजी



पांच रुपैया दरोगा को दई हूं
पांच रुपैया दरोगा को दई हूं
दस देहू कोतवाल
दस देहू कोतवाल
बाला जोवना फिरंगवा को देही हूं
बाला जोवना फिरंगवा को देही हूं
सैंया को लेई हूं छुड़ाय
बाला जोवना फिरंगवा को देही हूं
सैंया को लेई हूं छुड़ाय
बाबू दरोगाजी
बाबू दरोगाजी कौन कसूर पर धरले सैंया मोर
बाबू दरोगाजी

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