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मधुश्रावणी के फकरा (मंत्र-मिथिलावासियों के लिए)- Madhushravani Ke Fakda (Mantra For Maithili)

मधुश्रावणी के फकरा (मंत्र-मिथिलावासियों के लिए) Madhushravani Fakda (Mantra)

मधुश्रावणी के फकरा (मंत्र-मिथिलावासियों के लिए)
Madhushravani Fakda (Mantra)




जहिया से भेली मन मनारे, विषहरि खसली शंभु भंडारे।
कानथि गौरा फोड़ति डाह, हे दाई विषहरि राखू नाह।
अब तुलायली पांचों बहिनी, सकल शरीर धामि तेल बानी।
बिनी हे विश्वकर्मा देलनि देव दोतल के देखि देलन।
सामिल बाइल हरे परेखी, बेनी गुण कहि यति विशेषी।
आंतर आंतर लागल मोती, मुक्ता गाछ पाट के थोपी।
चारों कंचन चारो सामिक बरना, से देखि माई हे मालिन भूलना।
से देखि माई हे मालिन भूलना,डांटि लागल गरुड़ के बाला।
सोने बान्हू बान्ह करोड़ा,रुपे बान्हू गजमोति माला।
जे बिनई तिन बिनही सारी,गहा गूही लपटा दे नारी।
अन्हरा पावे नयन संयुक्ता,कोढ़िया पावे निर्मल काया।
बांझी नारी पावे पुत्ता। जे ई बिनई सुनये चित्त।
अन्न धन लक्ष्मी बढ़ए वित्त। जे ई बिनई सुनये चित्त।
तकरा वंश नाहि हो विष दोष, तकर पुरुष चलए लछ कोस।
जे ई बिनई लगाए बसात, विष दोष नहि आवे पास।
गोसाउँन दान बढ़ि, सोहाग बढ़ि, सुंदर बढ़ि, आधा सावन, जगत गोसाउँन।
मध्यस्थ राजक बेटी युगे सुमरक बहिन। मधु मधु महानाग, श्री नाग,
नागश्री, दाई के पांच पुत्र कोखि धरि नाहर पाट धरि बैसि बियाही,
मद्र मनिका धरहर ढाहि गोसाउँनि सन भाग, लीला सन सुहाग सुनहारिन के होई।

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