Page Nav

Grid

GRID_STYLE

True

TRUE

Hover Effects

TRUE

Pages

{fbt_classic_header}

Header Ad

Breaking News:

latest

Ads Place

सावन हे सखी सर्व सुहावन Sawan He Sakhi Sarv Suhavan

This song is about the women who is married and recalls her husband who is away from her and his family to earn his livelihood.  she celeb...




This song is about the women who is married and recalls her husband who is away from her and his family to earn his livelihood. she celebrates the Shravan Jhoola  without her husband and she says without you this festival is incomplete. Then his husband reply that once he will come back will celebrate this festival with you and family 


फिल्म :  

गायक : कंचन पाठक

गीतकार:  

संगीतकार: 


सावन हे सखी सर्व सुहावन

सावन हे सखी सर्व सुहावन

रिमझिम बरसल मेघ हो

सबके बलमुआ रामा घरे चली अइले हो

हमरे बलमुआ परदेश हो 

सबके बलमुआ रामा घरे चली अइले हो

हमरे बलमुआ परदेश हो 


तोहरा से बाटे धनि हमरो त नेहिया हो 

तोहरा से बाटे धनि हमरो त नेहिया हो 

कैसे बिसारब तोहके मन से

हमरा ऊपर बानि देशवा के करज हो

अब न रहब परदेस हो

सबके बलमुआ रामा घरे चली अइले हो

हमरे बलुमा परदेश हो 


आषाढ़ हे सखि असरा लगवनी हो

हमरा त न पूरल मान हो

पिया जब रहते त आस पुरबिते हो

पिया त बारी परदेस हो

सबके बलमुआ रामा घरे चली अइले हो

हमरे बलुमा परदेश हो 



कार्तिक हे धनि परब महीना हो

हम त रहब तोहरे आस हो

बबुनी बबुआ संगे तोहसे मिले के हो

पूरा त होई मन के आस हो

पूरा त होई मन के आस हो

सबके बलमुआ रामा घरे चली अइले हो

हमरे बलुमा परदेश हो 

अब ना रहब परदेस हो

हमरे बलुमा परदेश हो 

अब ना रहब परदेस हो

हमरे बलुमा परदेश हो 

अब ना रहब परदेस हो






इस गाने का मूल भाव यह है कि:
एक पत्नी अपने पति के घर से बाहर रहने पर सावन के महीने में याद करती है और सावन के झूले और  पर्व को पति के बिना मनाने की अनिच्छा व्यक्त करती है। उसी तरह उसका पति भी इस बात को स्वीकारता है और कहता है कि मेरे ऊपर परिवार का बोझ है जिसके लिए बाहर कमाने आया हुआ हूं। समय मिलेगा तो तुमसे और परिवार के अन्य सभी सदस्यों से मिलूंगा। उनके साथ बैठकर बातें करुंगा। तुम उदास मत होना। 


No comments



close