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चल भैया किनेला मछरिया Chal Bhaiya Kinela Machhariya

It was a time when goods were sold at very low prices. The poet says come on brother. Go to the fish market. This haat or market is held ...


It was a time when goods were sold at very low prices. The poet says come on brother. Go to the fish market. This haat or market is held only on Wednesday and Sunday. In this, fish will be available for only three and a half paise. At the same time, he also tells that fish like Rohu, Tengda, Katla etc. will be found in it, which can be described as good by using lots of chili spices. It will be eaten with marua's roti, bhunja etc.


फिल्म :  

गायक :  अजीत कुमार अकेला

गीतकार:  

संगीतकार: 



चल चल भैया हो किनेला मछरिया

चल भैया हो किनेला मछरिया

गौंआ के हाट लागे बुध इतवार

रेहू, टेंगड़ा, कतला, झींगवा

रेहू, टेंगड़ा, कतला, झींगवा

के लागल अंबार

साढ़े तीन पैसे 

साढ़े तीन पैसे मछली बिकाला मजेदार

साढ़े तीन पैसे

साढ़े तीन पैसे मछली बिकाला मजेदार

साढ़े तीन पैसे


धनिया हरदी लहसुन तीत लाल मिर्चैया

झोर सरसों के तनी नून चटकार

धनिया हरदी लहसुन तीत लाल मिर्चैया

झोर सरसों के तनी नून चटकार

पचफोरन के फोरन तेलवा 

पचफोरन के फोरन तेलवा 

मजगर दिह ढार 

फिर देखिह मछरिया में आ जाई बहार

साढ़े तीन पैसे

साढ़े तीन पैसे मछली बिकाला मजेदार

साढ़े तीन पैसे

साढ़े तीन पैसे मछली बिकाला मजेदार

साढ़े तीन पैसे


वाह जब फाटी लोहवा घुमे लेई रोरसिया

मोट मोट सीझल सीझल मरुआ के रोटिया

वाह जब फाटी लोहवा घुमे लेई रोरसिया

मोट मोट सीझल सीझल मरुआ के रोटिया

मरुआ के रोटिया पर बथुआ के साग

मरुआ के रोटिया पर बथुआ के साग

आ पर बसिया मछरिया बड़ा लागी चटकार

साढ़े तीन पैसे

साढ़े तीन पैसे मछरी बिकाला मजेदार

साढ़े तीन पैसे

साढ़े तीन पैसे मछरी बिकाला मजेदार

साढ़े तीन पैसे


सांझ खानी भुंजा भरी हरियर मिर्चैया

नून तेल गोल मिरिच के बुकनी मिलैह

सांझ खानी भुंजा भरी हरियर मिर्चैया

नून तेल गोल मिरिच के बुकनी मिलैह

कतरन प्याज आदि नींबू दिह गार

कतरन प्याज अब नींबू दिह गार

भूंजल पोिठया मछरिया ओही में दिह गार

साढ़े तीन पैसे

साढ़े तीन पैसे मछरी बिकाला मजेदार

साढ़े तीन पैसे

साढ़े तीन पैसे मछरी बिकाला मजेदार

साढ़े तीन पैसे


चाट पोछी के खैह भैया मूरा सब चिबैह

केहू देखे न केहू तिनको लजैह

चाट पोछी के खैह भैया मूरा सब चिबैह

केहू देखे केहू तिनको लजैह

खैइह अरिह ना थक ना जाए

खैइते रहिह थक न जाए जबले देखन हार

चलिह मोंछवा फहरा के भैया सगरो बाजार

साढ़े तीन पैसे

साढ़े तीन पैसे मछली बिकाला मजेदार

साढ़े तीन पैसे

साढ़े तीन पैसे मछली बिकाला मजेदार

साढ़े तीन पैसे

चल भैया हो किनेला मछरिया

गौंआ के हाट लागे बुध इतवार

रेहू, टेंगड़ा, कतला, झींगवा

के लागल अंबार

साढ़े तीन पैसे 

साढ़े तीन पैसे मछरी बिकाला मजेदार

साढ़े तीन पैसे

साढ़े तीन पैसे मछरी बिकाला मजेदार

साढ़े तीन पैसे

साढ़े तीन पैसे मछरी बिकाला मजेदार

साढ़े तीन पैसे

साढ़े तीन पैसे मछरी बिकाला मजेदार

साढ़े तीन पैसे


इस गाने का भाव है: यह उस समय की बात है जब काफी कम कीमत पर सामान बिकते थे। कवि कहता है कि चलो भाई। मछली बाजार चलते हैं। बुध और रविवार को ही यह हाट या बाजार लगती है। इसमें मछली सिर्फ साढ़े तीन पैसे में मिलेगा। साथ ही वह यह भी बताता है कि इसमें रोहू, टेंगडा, कतला आदि मछली मिलेगी जिसमें खूब मिर्च मसालों का उपयोग करके अच्छा बताया जा सकता है। साथ मरुआ के रोटी, भुंजा आदि के साथ इसे खाया जाएगा। 


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