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Tuesday, May 13, 2014

जय जय भैरवि असुर भयाउन


जय जय भैरवि असुर भयाउनि
पशुपति भामिनी माया।
सहज सुमति वर दिय हे गोसाउनि
अनुगति गति तुअ पाया।।-2

बासर रैनि सवासन शोभित-2
चरण चन्द्र्रमणि चूड़ा।
कतओक दैत्य मारि मुंह मेललि
कतओ उगिलि करु कूड़ा।।
जय जय भैरवि असुर भयाउनि....


सामर वरण नयन अनुंरजित-2
जलद जोग फुलकोका।
कट कट विकट ओठ पुट पांड़रि
लिधुर फेर उठ फोका।।
जय जय भैरवि असुर भयाउनि....

घन-घन-घनन घुघुरू कत बजाए-2
हन-हन कर तुअ काता।
विद्यापति कवि तुअ पद सेवक
पुत्र बिसरू जनु माता।।
जय जय भैरवि असुर भयाउनि......



 

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