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Wednesday, November 18, 2020

चोरी करिह पपिहू रे चाहे




फिल्म :  हमके साड़ी चाहीं

गायक :  भरत शर्मा व्यास

गीतकार: 

संगीतकार: 


कर फेरत करवटिया करके कंगना खनके खन शोर करे

साड़ी सरकत फरकत आंखियां कहिया अहिहें पिया मोर घरे

मन लागत नैखे एको छन तन आग बिरह से मोर जरे

मोर रात बितल जा गल जाल गौर पागल मनवा नहीं धीर धरे


अरे चोरी करिह पपिहू रे चाहे ,

अरे चोरी करिह पपिहू रे चाहे ,

खींचिह ठेला गाड़ी हमके  रे साड़ी चाहीं

कबले फींची गवना के झारी, हमके साड़ी चाहीं

चोरी करिह पपिहू रे चाहे ,

चोरी करिह पपिहू

चोरी करिह पपिहू

चोरी करिह पपिहू

चोरी करिह पपिहू

चोरी करिह पपिहू

अरे चोरी करिह पपिहू रे चाहे ,

खींचिह ठेला गाड़ी हमके रे साड़ी चाहीं

कबले फींची गवना के झारी, हमके साड़ी चाहीं


संग के सहेली हमार जिया हमार तरसावेली

संग के सहेली हमार

संग के सहेली हमार जिया हमार तरसावेली

किसीम किसीम के साड़ी लहंगा झमकावेली

लहंगा झमकावेली

अबे गठिया ल ए बलम जी हो हो

अबे गठिया ल बिहनी  

धइ लिह गाड़ी हमके साड़ी रे चाहीं

कबले फींची गवना के झारी, हमके साड़ी चाहीं


अरे धई लिह गाड़ी अबे गाठिया ल बिहनी 

धइ लिह गाड़ी हमके साड़ी रे चाहीं

कबले फींची गवना के झारी, हमके साड़ी चाहीं

याद कर कई बरिस भइल मोरी गवना

याद कर कई कई 

याद कर कई 

नैहरे के साया साड़ी ओढ़ना बिछौना

ओढ़ना बिछौना

भारी कंजूस रे बारी बारी बारी

आरे भारी कंजूस रे बारी बारी बारी

भारी कंजूस सासू मिलल बारी

हमके साड़ी रे चाहीं

कबले फींची गवना के झारी, हमके साड़ी चाहीं


करि का सिंगार नहीं हथवा में चूड़ी बा

करि का सिंगार 

करि का सिंगार 

करि का सिंगार नहीं हथवा में चूड़ी बा

चानी के अंगूठी बिना तरसत अंगूर बा

भलही ही न लागी ए बलम जी

भलही ही न लागी सैंया

भलही ही न लागी सैंया

भलही ही न लागी सैंया

भलही ही न लागी असवा

घर में केवारी बाकिर हमके साड़ी चाहीं

भलही ही न लागी असवा

घर में केवारी बाकिर हमके साड़ी चाहीं

कबले फींची गवना के झारी, हमके साड़ी चाहीं

कबले फींची गवना के झारी, हमके साड़ी चाहीं


अबही ले जनानी न ससुरा के सुखवा

दीनानाथ पांडे  पति के आनंद दुखवा

राही भरत दिहले

राही भरत दिहले

राही भरत दिहले

राही भरत दिहले

अरे सपना उजारी हमके साड़ी रे चाहीं

राही भरत दिहले

सपना उजारी हमके साड़ी रे चाहीं

कबले फींची गवना के झारी, हमके साड़ी चाहीं

कबले फींची गवना के झारी, हमके साड़ी चाहीं

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