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लाडो बेटी भरु न अँचरवा के लाज Lado Beti Bharu Na Ancharwa Ke Laaj

In this song, a father says while leaving his daughter after marriage that Beti Tum Meri Laj Rakhna. Always keep the bindiya of your sweethe...


In this song, a father says while leaving his daughter after marriage that Beti Tum Meri Laj Rakhna. Always keep the bindiya of your sweetheart shining. For this, keep your ethics and behavior in such a way that everyone in your in-laws can be happy and affectionate with you. May the dots of blessings and blessings continue to shine and shine in your lap. You are the fulfillment of all desires like but Savitri, then like Janak's beloved Sita, you should have a husband like Ramchandra. May you always remain sweet, this is my blessing. Have a relationship with your relatives like a cow and a calf. Respect your brother's and father's turban i.e. honor. Considering your in-laws as heaven more than your maternal home, it will continue to shine like a dot in your honeymoon. Mother-in-law, brother-in-law, sister-in-law, Jethani speak the sweetest speech, tie the knot of the seven words in your mind. Husband is like God to you, God keep him immortal, may this be your sweetheart.



फिल्म :  सुहाग बिंदिया

गायक :  सुरेश वाडेकर

गीतकार:  

संगीतकार: श्याम सागर


आ आ आ ओ ओ ओ ओ

चलू चलू सिया सुकुमारी धीया 

चलू गंगा बिन बहू

चलू गंगा पूजन हो 

लाडो बेटी भरू न अंचरवा अाशीष 

गमके हो सुहाग बिंदिया

लाडो बेटी भरू न अंचरवा अाशीष 

बिहस हो सुहाग बिंदिया



बेटी बट सावित्री के किरपा मनोरथ पाइ ल

हो जैसे जनक दुलारी पावे राम के गौरी के मनाइ ल

लाडो बेटी अचल अचल अहिवात हो

बेटी अचल अचल अहिवात अचल हो सुहाग बिंदिया

लाडो बेटी भरू न अंचरवा अाशीष 

बिहस हो सुहाग बिंदिया



गैया बछवा के नेहिया सनेहिया के गाेतिया गोहार के

ओ भैया बाबा के पगड़िया के लाज तू रखिह संभार के

लाडो बेटी नैहर सासुर के उछाह हो

बेटी नैहर सासुर के उछाह 

चमके हो सुहाग बिंदिया

लाडो बेटी भरू न अंचरवा अाशीष 

बिहस हो सुहाग बिंदिया



सासु ननदी देवर जेठ गोतनी सबहीं मीठ बोलिह

हो बेटी सातो रे बचनवा के गांठ सपनवो ना तोरीह

लाडो बेटी पति परमेश्वर रूप हो

बेटी पति परमेश्वर रूप अमर हो सुहाग बिंदिया

लाडो बेटी भरू न अंचरवा अाशीष 

बिहस हो सुहाग बिंदिया

लाडो बेटी भरू न अंचरवा अाशीष 

गमके हो सुहाग बिंदिया



इस गीत में एक पिता अपनी बेटी को शादी के बाद बिदा करते समय कहता है कि बेटी तुम मेरी लाज रखना। अपनी सुहाग की बिंदिया को हमेशा चमकाते रहना। इसके लिए अपने आचार विचार और व्यवहार को ऐसा रखना कि ससुराल में सभी तुमसे प्रसन्न और स्नेहिल रह सकें। तुम्हारे आंचल में इसी आशीर्वाद और दुआओं रूपी बिंदिया चमकती और दमकती रहे। तुम बट सावित्री की तरह सभी मनोकामनाओं की पूर्ति हो, तो जनक दुलारी सीता की तरह तुम्हें रामचंद्र जैसे पति हों। तुम हमेशा सुहागवती रहो यही मेरा आशीर्वाद है। गाय और बछड़े के जैसे तुम्हारे रिश्तेदारों से रिश्ता रहे। अपने भैया और पिता के पगड़ी यानि मान का सम्मान रखना। मायके से ज्यादा अपने ससुराल को ही स्वर्ग समझना यही तुम्हारी सुहाग में बिंदिया की तरह चमकता रहेगा। सास, देवर, ननद, जेठानी सबसे मधुर बोली बोलना, सातो वचनों का गांठ अपने मन में बांध लेना। पति तुम्हें परमेश्वर की तरह है उसे भगवान अमर रखें यही तुम्हारी सुहाग बंदिया हो। 

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