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Monday, August 31, 2015

के धनि हो खोल ना हो केवरिया

तृप्ति शक्या एवं अजीत कुमार 'अकेला
कजरी
के धनि हो खोल ना हो केवरिया
हम विदेशवा जइवे ना
के धनि हो खोल ना हो केवरिया
हम विदेशवा जइवे ना
हम विदेशवा जइवे ना
हम विदेशवा जइवे ना
हम विदेशवा जइवे ना
के धनि हो खोल ना हो केवरिया
हम विदेशवा जइवे ना
के धनि हो खोल ना हो केवरिया
हम विदेशवा जइवे ना

जो तूहू सैंया मोरे जइवा हो विदेशवा सैंया मोरे
सैंया मोरे जइवा हो विदेशवा 
सैंया मोरे जइवा हो विदेशवा 
तनि तू इतना कर दिह कि हमरे भैया के बुलावा द
हम नैहरवा जइवे ना
कि हमरे भैया के बुलावा द
हम नैहरवा जइवे ना
के धनि हो खोल ना हो केवरिया
हम विदेशवा जइवे ना

जो तू हू रानी मोरी जइब तू नैहरवा 
रानी मोरी जइब नैहरवा
रानी मोरी जइब नैहरवा
रानी मोरी जइब नैहरवा
त तू इतना सुनी ल ना
त तू इतना सुनी ल ना
इतना लागल बा रूपैया, उतना दे के जइह ना
इतना लागल बा रूपैया, उतना दे के जइह ना
कि हमरे भैया के बुलावा द
हम नैहरवा जइवे ना
जितना लागल बा रूपैया, उतना दे के जइह ना

जो तूहू राजा लेब शादी का रूपैया लेवा
लेब शादी का रूपैया लेवा
लेब शादी का रूपैया लेवा
लेब शादी का रूपैया लेवा
हमरो बतिया सुनी ल ना
जइसन बाबा घरवा रहली, ओइसन करके भेजिह ना
जइसन बाबा घरवा रहली, ओइसन करके भेजिह ना
के धनि हो खोल ना हो केवरिया
हम विदेशवा जइवे ना
के जइसन बाबा घरवा रहली, ओइसन करके भेजिह ना

जइसन तूहू रहलू धनिया, बाबा के घरवा 
ओ रानी बाबा के घरवा
ओ रानी बाबा के घरवा
ओ रानी बाबा के घरवा
ओइसन नाहीं होइबू ना,
ओइसन नाहीं होइबू ना,
होइहैं गोदिया मेें  हो ललनवा, घाटा पूरा होईहैं ना
होइहैं गोदिया मेें हो ललनवा,  घाटा पूरा होईहैं ना
के धनि हो खोल ना हो केवरिया
हम विदेशवा जइवे ना
के धनि हो खोल ना हो केवरिया
हम विदेशवा जइवे ना
हम विदेशवा जइवे ना
हम विदेशवा जइवे ना
हम विदेशवा जइवे ना
हम विदेशवा जइवे ना
के धनि हो खोल ना हो केवरिया
हम विदेशवा जइवे ना
कि हमरे भैया के बुलावा द
हम नैहरवा जइवे ना
के धनि हो खोल ना हो केवरिया
हम विदेशवा जइवे ना

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